Published on Jun 02, 2026
बिहार सरकार ने सरकारी जमीनों की निगरानी और संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए बिहार भूमि पोर्टल पर एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है। इस नई सुविधा के जरिए सरकारी जमीनों की पहचान ऑनलाइन की जा सकेगी, जिससे भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध कब्जों पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, राज्य में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी दिशा में अब भूमि से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है ताकि अधिकारियों को किसी भी क्षेत्र की सरकारी जमीन की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
सर्वेक्षण एवं भूमि अभिलेख विभाग की ओर से सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि सरकारी जमीन से जुड़ी जमाबंदियों को ऑनलाइन रिकॉर्ड में अलग से चिह्नित किया जाए। इससे संबंधित अधिकारियों को यह जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन सी जमीन सरकारी श्रेणी में आती है।
बिहार भूमि पोर्टल के e-Jamabandi मॉड्यूल में एक विशेष सुविधा जोड़ी गई है। इस फीचर की मदद से अधिकृत अधिकारी सरकारी भूमि की जानकारी ऑनलाइन खोज सकेंगे। इसके लिए उन्हें पोर्टल पर लॉगिन कर आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा।
अधिकारी सबसे पहले e-Jamabandi मॉड्यूल में लॉगिन करेंगे। इसके बाद रिपोर्टिंग सेक्शन में जाकर "Search Government Land" विकल्प का चयन करेंगे। जिला, हल्का, मौजा और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करने के बाद सर्च बटन पर क्लिक करना होगा। इसके बाद संबंधित क्षेत्र की सरकारी जमीन और उससे जुड़ी जमाबंदियों की सूची स्क्रीन पर दिखाई देगी।
इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से सरकारी जमीनों की निगरानी पहले से अधिक प्रभावी हो सकेगी। साथ ही भूमि विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध होने से फर्जीवाड़े की संभावना घटेगी और सरकारी जमीनों की जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेगी।
इसके अलावा विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध सरकारी जमीनों की पहचान करना भी आसान होगा, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
बिहार भूमि पोर्टल पर शुरू की गई नई सरकारी भूमि पहचान प्रणाली राज्य में डिजिटल भूमि प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे सरकारी जमीनों की सुरक्षा, निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा अवैध कब्जों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।