Published on Jun 17, 2026
पटना: बिहार में भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में विशेष भूमि सर्वेक्षण (Special Land Survey) से जुड़ी बड़ी अपडेट सामने आई है। राज्य सरकार ने जमीन सर्वे का कार्य पूरा करने की समयसीमा बढ़ाकर वर्ष 2027 तक कर दी है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी नए खतियान और नक्शे तैयार करने का कार्य तेज गति से किया जा रहा है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कहना है कि राज्य के सभी भू-अभिलेखों को डिजिटल और अद्यतन बनाने के लिए यह सर्वेक्षण अभियान महत्वपूर्ण है। इससे भूमि विवादों को कम करने और जमीन मालिकों को स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
अब तक विशेष भूमि सर्वेक्षण का मुख्य फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर था, लेकिन संशोधित नियमावली के बाद नगर निकायों और शहरी क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण कार्य शुरू किया जा रहा है।
इस प्रक्रिया के तहत:
नए डिजिटल नक्शे तैयार किए जाएंगे।
भूमि स्वामित्व का सत्यापन किया जाएगा।
पुराने अभिलेखों का मिलान किया जाएगा।
नए खतियान तैयार किए जाएंगे।
भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे भूमि विवादों को कम करने में यह कदम काफी प्रभावी साबित हो सकता है।
भूमि सर्वेक्षण कार्य की विशालता को देखते हुए सरकार ने इसकी अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। कई जिलों में सर्वेक्षण कार्य अभी भी प्रगति पर है, इसलिए सभी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।
नई समयसीमा के तहत विभाग का लक्ष्य है कि राज्य के प्रत्येक जिले में भूमि अभिलेखों का अद्यतन कार्य पूरा कर लिया जाए।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भूमि संबंधी सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग द्वारा की गई समीक्षा में कई मामलों में लापरवाही और शिकायतें सामने आने के बाद 50 से अधिक अंचल अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई है।
कार्रवाई के प्रमुख कारण:
दाखिल-खारिज मामलों में अनावश्यक देरी
शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं करना
प्रशासनिक लापरवाही
भ्रष्टाचार संबंधी आरोप
सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करना
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी निगरानी जारी रहने की बात कही गई है।
राजस्व एवं अंचल अधिकारियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद अब विभाग ने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार राज्यभर में लाखों भूमि संबंधी आवेदन लंबित हैं, जिनमें:
दाखिल-खारिज (Mutation)
परिमार्जन
लगान संबंधी मामले
भूमि रिकॉर्ड सुधार
ऑनलाइन आवेदन निस्तारण
जैसी सेवाएं शामिल हैं।
हड़ताल समाप्त होने के बाद अब इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया गया है।
विशेष भूमि सर्वेक्षण और प्रशासनिक सुधारों से आम नागरिकों को कई लाभ मिल सकते हैं:
✅ जमीन का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
✅ भूमि विवाद कम होने की संभावना बढ़ेगी।
✅ ऑनलाइन सेवाओं में पारदर्शिता आएगी।
✅ दाखिल-खारिज प्रक्रिया तेज हो सकती है।
✅ भ्रष्टाचार पर नियंत्रण मजबूत होगा।
✅ भविष्य में भूमि खरीद-बिक्री अधिक सुरक्षित हो सकेगी।
बिहार सरकार भूमि प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। वर्ष 2027 तक विशेष भूमि सर्वेक्षण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार पर सख्ती, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और लंबित मामलों के निपटारे के निर्देश यह संकेत देते हैं कि भूमि सेवाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में इन सुधारों का सीधा लाभ राज्य के लाखों जमीन मालिकों को मिल सकता है।