बिहार में जमीन मापी के नियम बदले, अब ग्रामीण और शहरी इलाकों में देना होगा ज्यादा शुल्क

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 बिहार में जमीन मापी शुल्क बढ़ा, जानें नई रेट लिस्ट Published on Jun 14, 2026

बिहार में जमीन मापी के नियम बदले, अब ग्रामीण और शहरी इलाकों में देना होगा ज्यादा शुल्क

बिहार में जमीन की मापी कराने वाले लोगों के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रैयती जमीन की मापी शुल्क में वृद्धि करते हुए नई दरें लागू करने का फैसला लिया है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जमीन की मापी पहले की तुलना में महंगी हो जायेगी।

विभाग की ओर से जारी नई व्यवस्था के अनुसार सामान्य और तत्काल (Tatkal) दोनों प्रकार की मापी सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क तय किये गये हैं। सरकार का कहना है कि बढ़ती तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव जरूरी था।

ग्रामीण क्षेत्रों में कितना लगेगा शुल्क?

नई दरों के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती जमीन की मापी कराने के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क देना होगा। हालांकि, एक आवेदन पर अधिकतम 4000 रुपये तक ही शुल्क लिया जायेगा।

इसका मतलब है कि अगर किसी आवेदन में कई खेसरा शामिल हैं, तब भी तय सीमा से अधिक शुल्क नहीं लिया जायेगा।

शहरों में जमीन मापी हुई और महंगी

नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन की मापी के लिए सरकार ने अधिक शुल्क निर्धारित किया है। शहरी क्षेत्रों में अब प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क देना होगा।

वहीं, एक आवेदन पर अधिकतम 8000 रुपये तक शुल्क लिया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जमीन संबंधी मामलों की जटिलता अधिक होने के कारण अलग शुल्क तय किया गया है।

तत्काल मापी के लिए दोगुना शुल्क

अगर कोई व्यक्ति तत्काल जमीन मापी कराना चाहता है, तो उसे सामान्य शुल्क से अधिक राशि देनी होगी।

ग्रामीण क्षेत्र में तत्काल मापी शुल्क

  • प्रति खेसरा : 2000 रुपये

  • अधिकतम शुल्क : 8000 रुपये

शहरी क्षेत्र में तत्काल मापी शुल्क

  • प्रति खेसरा : 4000 रुपये

  • अधिकतम शुल्क : 16000 रुपये

इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरी मामलों में लोगों को जल्दी सेवा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।

ऑनलाइन आवेदन से होती है जमीन मापी

राजस्व विभाग के अनुसार वर्तमान में बिहार काश्तकारी नियमावली, 1885 के नियम-23 के तहत ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद अंचल कार्यालयों द्वारा जमीन की मापी की जाती है।

राज्य सरकार लगातार भूमि संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में मापी प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार ने क्यों बढ़ाया शुल्क?

विभाग का कहना है कि लंबे समय से जमीन मापी शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया था। लेकिन अब प्रशासनिक खर्च, तकनीकी संसाधन और डिजिटल सेवाओं की जरूरत बढ़ने के कारण शुल्क संशोधन आवश्यक हो गया था।

अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था से मापी कार्य में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को समय पर सेवा मिल सकेगी।

अधिकारियों ने क्या कहा?

राजस्व अधिकारियों ने बताया कि नई शुल्क दरों का मुख्य उद्देश्य जमीन मापी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना है।

लोगों से अपील की गयी है कि वे जमीन मापी के लिए केवल आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन करें और किसी भी प्रकार के दलालों से सावधान रहें।

किसानों और भू-धारियों में चर्चा तेज

नई दरों की घोषणा के बाद किसानों और जमीन मालिकों के बीच चर्चा शुरू हो गयी है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे भूमि विवादों के मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

वहीं कई लोगों ने बढ़े हुए शुल्क को आम रैयतों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। खासकर छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए तत्काल मापी शुल्क काफी अधिक माना जा रहा है।

क्या करें अगर जमीन मापी करानी हो?

अगर आप बिहार में अपनी जमीन की मापी कराना चाहते हैं, तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करते समय जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज और खेसरा विवरण सही तरीके से भरना जरूरी है।

आवेदन स्वीकृत होने के बाद संबंधित अंचल कार्यालय द्वारा मापी की प्रक्रिया पूरी की जायेगी।

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