Published on May 25, 2026
बिहार में जमीन रजिस्ट्री, भूमि सर्वे और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लागू किए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी नई व्यवस्था का उद्देश्य जमीन विवाद कम करना, रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना और लंबित सर्वे कार्यों को समय पर पूरा करना है।
=> नई व्यवस्था के तहत अब रजिस्ट्री प्रक्रिया, सर्वे कार्य और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में सख्ती बढ़ा दी गई है।
अब बिहार में जमीन रजिस्ट्री से पहले संबंधित अंचल अधिकारी (CO) की जांच रिपोर्ट लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
=> नई व्यवस्था के अनुसार:
=> जांच में यह देखा जाएगा कि जमीन विवादित तो नहीं है और दस्तावेज सही हैं या नहीं।
सरकार का मानना है कि इससे फर्जी रजिस्ट्री और जमीन विवाद के मामलों में कमी आएगी।
राज्य सरकार ने बिहार में चल रहे भूमि सर्वे कार्य को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
=> विभाग ने स्पष्ट किया है कि:
=> सरकार रिकॉर्ड को डिजिटल और व्यवस्थित बनाने पर जोर दे रही है।
सरकार ने लंबे समय से सरकारी जमीन पर रह रहे लोगों को राहत देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।
=> नई व्यवस्था के अनुसार:
उन्हें मालिकाना हक देने की तैयारी की जा रही है।
हालांकि सड़क, नाला और अतिक्रमण वाली जमीन पर यह नियम लागू नहीं होगा।
बिहार सरकार ने धार्मिक न्यास बोर्ड के साथ मिलकर मठ और मंदिरों की जमीन को लेकर भी अभियान शुरू किया है।
=> इसके तहत:
=> सरकार का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं की जमीन को सुरक्षित रखना जरूरी है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य:
है।
=> जमीन से जुड़े किसी भी कार्य से पहले:
बिहार में जमीन रजिस्ट्री और सर्वे को लेकर लागू किए गए नए नियम आने वाले समय में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
=> सरकार अब जमीन रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विवाद मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।