Published on May 27, 2026
बिहार सरकार ने जमीन रिकॉर्ड व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के शहरी क्षेत्रों में भी विशेष भू-सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने लोकहित परियोजनाओं के लिए नई रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को भी मंजूरी दे दी है।
=> नई नीति के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन खरीदने पर रैयतों को बाजार दर के मुकाबले चार गुना तक भुगतान किया जाएगा।
बिहार मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई है।
=> इसके बाद अब ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरों में भी:
सरकार का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते निर्माण और जमीन लेनदेन को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
कैबिनेट के अनुसार भू-सर्वेक्षण प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे प्रावधान सामने आए थे, जिनमें संशोधन की जरूरत महसूस की गई।
=> इसी कारण नई नियमावली में:
सरकार का मानना है कि इससे जमीन रिकॉर्ड प्रणाली अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनेगी।
बिहार सरकार ने लोकहित से जुड़ी केंद्रीय और राज्य परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने हेतु बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 लागू करने का निर्णय लिया है।
=> अब सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने पर रैयतों से आपसी सहमति के आधार पर सीधे जमीन खरीदी जा सकेगी।
नई नीति के तहत जमीन खरीद के लिए मुआवजा राशि को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है।
=> सरकार के अनुसार:
इस फैसले से किसानों और जमीन मालिकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने नई नीति के तहत खरीदी जाने वाली जमीन को स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क से मुक्त रखने का भी निर्णय लिया है।
=> इससे:
मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर मुहर लगी।
=> इनमें:
जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल रहे।
बिहार सरकार अब जमीन रिकॉर्ड और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। शहरों में भू-सर्वेक्षण शुरू होने और नई भूमि खरीद नीति लागू होने से जमीन से जुड़े रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
=> आने वाले समय में बिहार में जमीन रिकॉर्ड, खतियान और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।